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pवसंत पंचमी के दिन घरों में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है, अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। /p
pयह फेस्टिवल वसंत के आगमन की तैयारी का प्रतीक माना जाता है।/p
pगोवर्धन पूजा विशेष रूप से मथुरा की कृष्णा नगरी में की जाती है। इस दिन गाय पूजा का भी बहुत महत्व माना जाता है। गोवर्धन पूजा की कथा भगवान कृष्ण से जुड़ी है। इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार का नाश किया था।/p
pत्रिशूर पूरम में भाग लेने के लिए विभिन्न जिलों के लोग इस त्यौहार में शामिल होते हैं।/p
pयह पर्व वीरता का उपासक है, भारतीय संस्कृति की वीरता की पूजा है।/p
pउदयपुर का मेवाड़ पर्व यह भारत में विश्व का दूसरा सांस्कृतिक उत्सव प्रतिवर्ष मनाया जाता है। /p
pमेवाड़ महोत्सव उदयपुर में पूरे उत्साह और समर्पण के साथ वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए मनाया जाता है।/p