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pत्योहार की तारीख तिब्बती कैलेंडर के पांचवें महीने के दसवें दिन मनाई जाती है। इसे पद्मसंभव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।/p
pब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उठाया था गोवर्धन पर्वत/p
pहेमिस मठ लद्दाख में हेमिस नमक स्थान पर द्रुकपा वंश का एक हिमालयी बौद्ध मठ या गोम्पा है।/p
pगोवर्धन पूजा विशेष रूप से मथुरा की कृष्णा नगरी में की जाती है। इस दिन गाय पूजा का भी बहुत महत्व माना जाता है। गोवर्धन पूजा की कथा भगवान कृष्ण से जुड़ी है। इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार का नाश किया था।/p
pजानिए क्या है मकर संक्रांति का इतिहास, इसलिए कहा जाता है तिल संक्रांति/p
pमन्नट्टू पद्मनाभन ने उस समय नायर में अंध विश्वास को दूर करने के लिए 'नायर सर्विस सोसाइटी' नामक एक संस्था की स्थापना की थी। केरल को भारत में शामिल करने के आंदोलन में उन्हें 68 साल की उम्र में जेल जाना पड़ा था।/p
pकार्निवल श्रोव मंगलवार पर समाप्त होता है, जो ऐश बुधवार को लेंट की शुरुआत से एक दिन पहले होता है।/p