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pयह त्रिशूर पूरम फेस्टिवल त्रिशूर के वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में हर साल पूरम दिन पर आयोजित किया जाता है।/p
pइस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना की पूजा करने का विधान है।/p
pमलयालम कैलेंडर के अनुसार, यह ओणम त्योहार चिंगम के महीने में आता है और हिंदी कैलेंडर के अनुसार, श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है।/p
pत्रिशूर पूरम में भाग लेने के लिए विभिन्न जिलों के लोग इस त्यौहार में शामिल होते हैं।/p
pनवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। माघ, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।/p
pपौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को कारागार में हुआ था।/p
pब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उठाया था गोवर्धन पर्वत/p