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pयह फेस्टिवल वसंत के आगमन की तैयारी का प्रतीक माना जाता है।/p
pत्रिशूर पूरम में भाग लेने के लिए विभिन्न जिलों के लोग इस त्यौहार में शामिल होते हैं।/p
pत्योहार की तारीख तिब्बती कैलेंडर के पांचवें महीने के दसवें दिन मनाई जाती है। इसे पद्मसंभव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।/p
pतमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।/p
pमलयालम कैलेंडर के अनुसार, यह ओणम त्योहार चिंगम के महीने में आता है और हिंदी कैलेंडर के अनुसार, श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है।/p
pवसंत पंचमी के दिन घरों में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है, अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। /p
pपौराणिक इतिहास, पूजा पद्धति, महत्व, कथा, मंत्र और इस समय के संयोग/p