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pयह त्रिशूर पूरम फेस्टिवल त्रिशूर के वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में हर साल पूरम दिन पर आयोजित किया जाता है।/p
pपौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को कारागार में हुआ था।/p
pरोंगाली बिहु या बोहाग बिहु असम का एक महत्वपूर्ण फेस्टिवल है, यह बिहु शब्द बिहु नृत्य और बिहू लोक गीत दोनो की और संकेत करता है। /p
pइस रथयात्रा में भाग लेने के लिए और इसके दर्शन लाभ के लिए हज़ारों, लाखों की संख्या में बाल, वृद्ध, युवा, नारी देश के सुदूर प्रांतों से आते हैं।/p
pदशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है। /p
pस्वामी विवेकानंद ने अपनी तेजस्वी आवाज और अपने प्रभाव से विदेशों में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का डंका बजाया।/p
pदिसंबर महीने में लद्दाख में मनाया जाने वाला लोसर फेस्टिवल यहां का खास आकर्षण है। जिसमें शामिल होकर आपको यहां की संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलता है।/p