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pहेमिस मठ लद्दाख में हेमिस नमक स्थान पर द्रुकपा वंश का एक हिमालयी बौद्ध मठ या गोम्पा है।/p
pत्योहार की तारीख तिब्बती कैलेंडर के पांचवें महीने के दसवें दिन मनाई जाती है। इसे पद्मसंभव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।/p
pकार्निवल श्रोव मंगलवार पर समाप्त होता है, जो ऐश बुधवार को लेंट की शुरुआत से एक दिन पहले होता है।/p
pत्रिशूर पूरम में भाग लेने के लिए विभिन्न जिलों के लोग इस त्यौहार में शामिल होते हैं।/p
pपौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को कारागार में हुआ था।/p
pइस रथयात्रा में भाग लेने के लिए और इसके दर्शन लाभ के लिए हज़ारों, लाखों की संख्या में बाल, वृद्ध, युवा, नारी देश के सुदूर प्रांतों से आते हैं।/p
pयह पांच दिवसीय लंबे दिवाली त्योहार का पहला दिन है। तीन दिनों तक चलने वाला गोत्रीरात्र व्रत भी धनतेरस से ही शुरू हो जाता है। धन तेरस का अर्थ है धन के तार।/p